हमारे बारे में

वकीलों द्वारा वकीलों के लिए बनाया गया।

रूट्स रिसोर्स एक सहयोगात्मक मंच है जहां देश भर के वकील और अन्य विशेषज्ञ जरूरतमंद वादियों के साथ मिलकर काम कर रहे हैं, एक-दूसरे के साथ अपने रिसर्च को शेयर कर सकते हैं, मामलों में परिणामों में सुधार करने की रणनीतियों पर विचार कर सकते हैं और वकीलों का बड़े समुदाय न्याय व्यवस्था तक पहुंच को मजबूत बनाने के लिए कार्य कर रहा है।

इस रिसोर्स का विकास दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान, मध्य प्रदेश और तेलंगाना में कार्यरत सुनवाई वकीलों के मार्गदर्शन से किया गया है जो कि नियमित तौर पर कमजोर तबके के व्यक्तियों और समुदायों का प्रतिनिधित्व करते हैं।

जबकि अपीली वकील और अपीली न्यायालय के निर्णय लोक कल्पना में लगभग लगातार रहते हैं, सुनवाई की वकालत के लिए कई सामाजिक न्याय संघर्षों की नींव होने के बावजूद भी, उसे जो चाहिये प्राय: वह मान्यता या समर्थन प्रदान नहीं किया जाता है।

सुनवाई के वकील हमारे समान न्याय तक पहुंच के लक्ष्य की "रूट्स" हैं| यह रिसोर्स उन्हें समर्थन देने का एक साधन है क्योंकि वे महत्वपूर्ण, कठिन कार्य करते हैं जो कानून का शासन बनाए रखता है|

लोग

संस्थापक

स्वाति सुकुमार

स्वाति नई दिल्ली में स्थित एक वकील है। उन्होंने आई.पी विधि में विशेषज्ञता प्राप्त की है और वे कई महत्वपूर्ण आई.पी निर्णयों में सलाहकार रह चुकी हैं। स्वाति नल्सार(2005) और कोलंबिया विधि विद्यालय (2010) की पूर्व छात्रा रह चुकी हैं| 2011 में उन्होंने आईप्रोबोनो भारत की स्थापना की, और उसे न्याय/मुकदमे से जोड़ा जो उन्होंने 2019 तक चलाया|

सलाहकार

मदन लोकुर (सेवानिवृत्त), भारत के सर्वोच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति

न्यायमूर्ति लोकुर दिसंबर 2018 में भारत के सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में सेवानिवृत्त हो गये। 1977 में उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से विधिवत डिग्री प्राप्त की। 1998 में उन्हें अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल नियुक्त किया गया और 1999 में दिल्ली उच्च न्यायालय के न्यायाधीश बने। 2009 में वे गुवाहाटी के मुख्य न्यायाधीश बने और 2011 में उन्हें आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के रूप में नियुक्त किया गया। भारत के सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश के रुप में उन्हें जून 2012 में नियुक्त किया गया और वह दिसंबर 2018 में सेवानिवृत्त हो गये। फिजी के सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश के रुप में उन्हें जनवरी 2019 में नियुक्त किया गया और उन्होंने अगस्त 2019 में न्यायाधीश की शपथ ली।

डॉ. कल्पना कन्नबीरन

कल्पना कन्नबीरन समाजविज्ञान की प्राध्यापिका और सामाजिक विकास परिषद्, हैदराबाद जो की एक स्वायत्त अनुसंधान संस्थान है, उसकी प्रादेशिक निदेशक हैं। उनके पास जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय की पी.एच.डी डिग्री और उस्मानिया विश्वविद्यालय की न्यायशास्त्र की एल.एल.एम डिग्री है। आई.सी.एस.एस.आर ने अपने उद्घाटन वर्ष, 2012 में कानून के अनुशासन में अपने काम के लिए प्रतिष्ठित सामाजिक वैज्ञानिकों के लिए दिए जानेवाले अमर्त्य सेन पुरस्कार के प्राप्तकर्ता, कल्पना को 2003 में कानून के सामाजिक पहलूओं के क्षेत्र में सामाजिक विज्ञान अनुसंधान के लिए वी.के.आर.वी राव पुरस्कार से सम्मानित किया गया। उनके काम ने भारत में गैर-भेदभाव, संरचनात्मक हिंसा, और संवैधानिकता और सामाजिक न्याय के सवालों की सामाजिक नींव को समझने पर ध्यान केंद्रित किया है - लिंग, यौन अल्पसंख्यकों, जाति, आदिवासी/स्वदेशी अधिकारों और विकलांगता अधिकारों पर विशेष ध्यान दिया है। उनकी कुछ किताबें न्याय के साधन हैं: गैर भेदभाव और भारतीय संविधान, रूटलेज, नई दिल्ली, 2012; हिंसा अध्ययन [संपादक], ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस, 2016; भारत सामाजिक विकास रिपोर्ट: विकलांगता अधिकार परिप्रेक्ष्य, [सह-संपादक] ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस, 2017; तेलंगाना सामाजिक विकास रिपोर्ट [सह-संपादक], सी.एस.डी: हैदराबाद, 2017; फेमिनिस्ट मेथड्स री-प्रेजेंटिंग: इंटरडिसिप्लिनरी एक्सप्लोरेशन [सह-संपादक] रूटलेज, 2017।

सीमा मिश्रा

सीमा दिल्ली में एक वकील है जिन्हें तीन दशकों से अधिक समय से चली आ रही कानूनी अधिकारिता का अनुभव है। इसके साथ वह 2009 से सक्रिय व्यवहार में रही है। वह दिल्ली राज्य विधि सेवा प्राधिकरण के पैनल में है और उन्हें दक्षिण जिले के यौन अपराधों के लिए विशेष पी.ओ.सी.एस और फास्ट-ट्रैक कोर्ट में नियुक्त किया गया है। वह ए.ए.एल.आई लखनऊ की ट्रस्टी हैं। वह यू.एन.डी.पी में न्यायिक परियोजनाओं तक पहुंच और एमनेस्टी इंटरनेशनल के लिए सलाहकार रही हैं, जिस समय उन्होंने पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़, उड़ीसा और आंध्र प्रदेश में सिटी और डिस्ट्रिक्ट लेवल के जजों और मजिस्ट्रेटों के लिए आपराधिक न्याय प्रणाली पर प्रशिक्षण कार्यक्रमों की रूपरेखा तैयार की और उन्हें प्रशिक्षण दिया। वह जबरन निष्कासन पर संयुक्त राष्ट्र के विशेष संबंध में एक सलाहकार भी रही हैं। वह मानव अधिकारों और न्याय तक पहुंच के क्षेत्र में विभिन्न प्रकाशनों की लेखिका हैं।

गीता रामसेशन

गीता एक ऐसी वकील है जो चेन्नई में आपराधिक विधि के 40 वर्ष के अनुभव और व्यवहार में संलग्न हैं, उन्होंने महिलाओं और बच्चों के साथ बड़े पैमाने पर काम किया है और एच.आई.वी/एड्स से पीड़ित महिलाओं, हिरासत में हिंसा से बचने वाली महिलाओं, महिलाएं और बच्चे जिन्हें यौन हिंसा से बचाया गया है, जिन कैदियों पर जांच चल रही है, किशोर बच्चों और अल्पसंख्यक समूह जिन्हें भेदभाव का सामना करना पड़ता है ऐसे लोगों का प्रतिनिधित्व किया है। वह पंद्रह वर्षों के लिए सी.बी.आई की विशेष लोक अभियोजक रही हैं। वह अमेरिका के पिट्सबर्ग विश्वविद्यालय से एक हाइन्ज़ फ़ेलो हैं। वह मानवाधिकार, जनहित याचिका और न्याय पर एक आइजनहावर फ़ेलो भी हैं। वह पिट्सबर्ग विश्वविद्यालय, मद्रास विश्वविद्यालय के अपराध विज्ञान विभाग और हैदराबाद के केंद्रीय विश्वविद्यालय में गेस्ट फैकल्टी रही हैं। वर्तमान में वह एशियन कॉलेज ऑफ जर्नलिज्म, चेन्नई में एक सहायक फैकल्टी हैं जहां वह मीडिया, विधि और सोसाइटी विषय पढ़ाती हैं। उनके नाम पर कई प्रकाशन हैं, जिनमें "चाइल्ड एंड द लॉ" पर एक पुस्तक भी शामिल है, जिसे उन्होंने सह-लेखित किया है।

अभिदाता
  • माननीय न्यायमूर्ति श्री जे आर मिढा, दिल्ली उच्च न्यायालय
  • निकिता खैतान, वकील
  • नवीन नागार्जुना, वकील
  • सूर्या राजप्पन, वकील
  • सिद्धार्थ सतीजा, वकील
  • अभिनव सेखरी, वकील
  • सौजन्य शंकरन, वकील
  • सुभोश्री सील, वकील
  • कुशंक सिंधु, वकील
  • सौरभ भट्टाचार्जी, श्रम कानून और आजीविका केंद्र
  • अंकिता गोस्वामी, आईप्रोबोनो
  • प्रिया वतवानी, आईप्रोबोनो
  • शोहिनी बनर्जी, पूर्व, लिंग और विकास सलाहकार आईप्रोबोनो
  • सौरभ मलिक, टोरंटो विश्वविद्यालय, पूर्व आईप्रोबोनो
  • डॉ मृणाल सतिश, राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय, दिल्ली
  • श्रेया श्री, स्वतंत्र कानूनी शोधकर्ता
  • पीयूष तिवारी, सेवलाइफ फाउंडेशन
  • करुणा रैना, सेवलाइफ फाउंडेशन
  • गंगोत्रीनाथ हजारिका, सेवलाइफ फाउंडेशन
  • सिद्धार्थ अग्रवाल का चैम्बर
निम्न के परामर्श से विकसित
  • वकालत और कानूनी पहल संघ(ए.ए.एल.आई), लखनऊ
  • श्रम कानून और आजीविका केंद्र, एन.यू.जे.एस, कोलकाता
  • सेवलाइफ फाउंडेशन, नई दिल्ली
  • जन साहस सामाजिक विकास समाज, नई दिल्ली
  • राष्ट्रीय दलित मानवाधिकार अभियान, नई दिल्ली
इनके द्वारा डिजाइन किया गया
इनको विशेष धन्यवाद
  • डॉ अरुद्रा बुर्रा
  • वसंत निरंजन बुर्रा